वृक्ष लगेंगे मेघ बरसेंगे, रक्षित
मिटटी-पानी।
पर्यावरण जिन्दा, जो
आँगन गन्दा ?
धरापे वृक्ष लगाओ
पर्यावरण बचाओ।
धरा को बंजर, न
माने मानव?
उगाओ हरे वन
संवारो जीवन।
हरियाली लहलहाये
वृक्ष कर पायें।
धरा की सच्ची शान
मानव-आन।
प्रदूषणीय समाज
पनपे आज ?
ता-ता-थैय्या, बचें पोखर
ताल-तलैया।
खग-मृगों का डेरा
जीवन-सवेरा।
पर्वतों से, लगती
छटा निराली।
कृषि-भूमिपे, उपजे
अन्न कहां ?
पशु-पक्षी-रक्षण
है पर्यावरण।
- नागेन्द्र दत्त शर्मा
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