मंगलवार, 29 अप्रैल 2014

वक़्त-दुःख-सुख-जीवन-मृत्यु -ईश्वर पर 'हाइकू'

उसकी सत्ता महान
सर्वज्ञता, वत्सलता महान
कौन है वह?
  •  
भिखारी दर पे
ख़ुदा भी हो सकता है
ख़ाली  न भेज।
  •  
समझ जाओ
सत्यं, शिवं, सुंदरम की है
सारी महिमा।
  •  
ईश्वर-अर्चना
पत्र, पुष्प, जल से
सिद्धि भावना से।
  •  
जन्मा है जो
मृत्यु भी निश्चित
फिर भय कैसा ?
  •  
मंदिर-मस्जिद
गिरजा-गुरुद्वारा 
ख़ुदा मिला कहीं ?
  •  
ये अजब दुनिया
जिसने भी बनायीं
समझ आयी ?
  •  
बहा ले जाता
सैलाब रंजो-गम सब
इंसानी खुशियां।
  •  
जीवन-पड़ाव
हर बार नए अन्दाज़
सिखातें सबको ।
  •  
उमंगें पूरी हों न हों
मिलता मानव जीवन
मुश्किल से।
  •  
संजीदगी का दानव
नहीं निकलता यूँ ही
मानव मन से।
  •  
संवारी यहां
जितनी जीवन-यादें
कैसे मिटादें ?
  •  
जीवन-रंग
मिलते किस्मत के संग
मत हो दंग ।
  •  
तुझको मिला
तेरा नसीब, मुझे मिला
तो क्यों गिला ?
  •  
दुःख के पल
आयें हैं जाएंगे भी
तू चल-न-चल।
  •  
वक़्त ने किया
जब वक़्त पे ताकीद
अब रो के फ़ायदा ।
  •  
कांटों की डगर पे
रास्ते का पत्थर जैसा
मानव जीवन।
  •  
वक़्त का पहिया
न रुके, रोक सको तो
रोक लो भैया।
  •  
अपनी विपदा
हम सब आप ही जाने
कोई क्यों पहचाने।
  •  
बीतेंगे दुःख के पल
समझौता होगा गमों से
लौटेंगी खुशियां सारी।
  •  
मर्म ये मिलता है
मौत के डर से ही तो
जीवन चलता है ।
  •  
सुख तभी पाओगे
दुःख के सागर में जब
गोते लगाओगे ।
  •  
जीवन के रंग
हो जाते बदरंग सारे
दुःखों के संग।
  •  
समय का उस्तरा
करे आलसी का भाग्य
केश-विहीन।
  •  
समय का चक्र
कभी ऊपर कभी नीचे
परिवर्तन प्रतिपल।
  •  
ग्रहों की चाल
शनि की वक्र दृष्टि
अच्छे-२  बेहाल।










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