उसकी सत्ता महान
सर्वज्ञता, वत्सलता महान
कौन है वह?
ख़ुदा भी हो सकता है
ख़ाली न भेज।
सत्यं, शिवं, सुंदरम की है
सारी महिमा।
पत्र, पुष्प, जल से
सिद्धि भावना से।
मृत्यु भी निश्चित
फिर भय कैसा ?
गिरजा-गुरुद्वारा
ख़ुदा मिला कहीं ?
जिसने भी बनायीं
समझ आयी ?
सैलाब रंजो-गम सब
इंसानी खुशियां।
हर बार नए अन्दाज़
सिखातें सबको ।
मिलता मानव जीवन
मुश्किल से।
नहीं निकलता यूँ ही
मानव मन से।
जितनी जीवन-यादें
कैसे मिटादें ?
मिलते किस्मत के संग
मत हो दंग ।
तेरा नसीब, मुझे मिला
तो क्यों गिला ?
आयें हैं जाएंगे भी
तू चल-न-चल।
जब वक़्त पे ताकीद
अब रो के फ़ायदा ।
रास्ते का पत्थर जैसा
मानव जीवन।
न रुके, रोक सको तो
रोक लो भैया।
हम सब आप ही जाने
कोई क्यों पहचाने।
समझौता होगा गमों से
लौटेंगी खुशियां सारी।
मौत के डर से ही तो
जीवन चलता है ।
दुःख के सागर में जब
गोते लगाओगे ।
हो जाते बदरंग सारे
दुःखों के संग।
करे आलसी का भाग्य
केश-विहीन।
कभी ऊपर कभी नीचे
परिवर्तन प्रतिपल।
शनि की वक्र दृष्टि
अच्छे-२ बेहाल।
सर्वज्ञता, वत्सलता महान
कौन है वह?
ख़ुदा भी हो सकता है
ख़ाली न भेज।
सत्यं, शिवं, सुंदरम की है
सारी महिमा।
पत्र, पुष्प, जल से
सिद्धि भावना से।
मृत्यु भी निश्चित
फिर भय कैसा ?
गिरजा-गुरुद्वारा
ख़ुदा मिला कहीं ?
जिसने भी बनायीं
समझ आयी ?
सैलाब रंजो-गम सब
इंसानी खुशियां।
हर बार नए अन्दाज़
सिखातें सबको ।
मिलता मानव जीवन
मुश्किल से।
नहीं निकलता यूँ ही
मानव मन से।
जितनी जीवन-यादें
कैसे मिटादें ?
मिलते किस्मत के संग
मत हो दंग ।
तेरा नसीब, मुझे मिला
तो क्यों गिला ?
आयें हैं जाएंगे भी
तू चल-न-चल।
जब वक़्त पे ताकीद
अब रो के फ़ायदा ।
रास्ते का पत्थर जैसा
मानव जीवन।
न रुके, रोक सको तो
रोक लो भैया।
हम सब आप ही जाने
कोई क्यों पहचाने।
समझौता होगा गमों से
लौटेंगी खुशियां सारी।
मौत के डर से ही तो
जीवन चलता है ।
दुःख के सागर में जब
गोते लगाओगे ।
हो जाते बदरंग सारे
दुःखों के संग।
करे आलसी का भाग्य
केश-विहीन।
कभी ऊपर कभी नीचे
परिवर्तन प्रतिपल।
शनि की वक्र दृष्टि
अच्छे-२ बेहाल।

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