बुधवार, 7 मई 2014

जिंदगी-हक़ीक़त-इश्क़-मौहब्बत के 'हाइकू'


पेश करूं  कैसे
है यादों की सौगात
दिल में बसी।
  •  
किया  उसने
याद मानो मुक़द्दर
बदल गया।
  •  
आखिर तुम्हे
आही गया अंदाज़
रिश्ता निभाने का।
  •  
चन्दन-बदन,
चंचल-चितवन
महके तन-मन।
  •  
घायल  हुआ
दिल तेरी अदा से
एक नज़र में।
  •  
हुई रौशनी
प्यार की, क़ि दिल
रौशन होगया।
  •  
प्यार के रंग
मेरी चाहत के ढंग
दोनों निराले।
  •  
साँझ ढ़ले
शंख बजे, दीप जले
याद आये तेरी।
  •  
कैसे मानलूं
उसका इश्के जुनूँ
था मेरे लिए।
  •  
उसकी चाहत ने
चैन मेरा चुराया
मै क्या करूँ।
  •  
खूबसूरती
ज्यादा बन जाती है
अपनी दुश्मन।
  •  
चांदनी रात में
हाथ तेरे हाथ में
भुलाऊँ कैसे?
  •  
तुझे देखूं  तो
मेरा अक्श आँखों में
ग़ज़ब ढाता है।
  •  
उसने कुछ
ऐसा किया बयां कि
शायरी होगयी।
  •  
इश्क़ ज़ज्बाती
समुन्दर जिसमे  
डूब के जाना।
  •  
सच्चे मित्र जो
दुःख में आये काम
बाकी बेदाम।
  •  
तू ही जन्नत
तू ही प्यार, तू ही
बहार मेरी।
  •  
जीवन भर
सताया प्यार ने
जो  बेवफा था।
  •  
गीत विरह के
गांयें चंचल नैना
ज्यूँ तोता-मैना।
  •  
चंचल चितवन
महके जीवन, क्या
रूप सलोना ?
  •  
दर्दे-जिगर
दर्दे-वफ़ा, फिरभी
सतायें आप ?














'हाइकू' में दुःख-सुख-अंधियारा-उजियारा

ताक़त का ग़रूर
किसी-2 में जरूर 
न सारे मग़रूर।
  •  
सोचोगे अच्छा
पाओगे अच्छा  तो
होगा  भी अच्छा।
  •  
जिसके दिल में
दूसरों के लिये मान
है वही इंसान।
  •  
किया मज़ाक
संजीदगी पर वो
खिलखिलाया।
  •  
रात में सन्नाटा
चीखता बेदर्दी से
जैसे कुत्ता कोई।
  •  
कटु वचन
बनादे दोस्त-दुश्मन
बिंधे ये  मन।
  •  
जाने कौन था
काली रात के साये में
क्या  मेरा डर?
  •  
काँटों की डगर पे
रस्ते का पत्थर जैसा
मेरा जीवन।
















मंगलवार, 6 मई 2014

प्रकृति पर 'हाइकू'

खग बोले तो
जीवन डोले अनोखी 
प्रातः बेला  मे।
  •  
मेघ नभ में
चाँद-तारे बिचारे
छिपते फिरें।
  •  
इधर तेज़
उधर तम, दोनों
पक्ष सिक्के के।
  •  
रात ने जन्मा
उजाला, रंज क्यों
बिछड़ने का ?
  •  
निशा के जाते
लायी उषा रवि को
स्व-आँचल में।
  •  
सीख  बया की
बन्दर को, घोंसला
गंवाना पड़ा।
  •  
एक दीये में
जलके तेल-बाती
तेज़ फैलाती।
  •  
वादा निभाने
तोड़ लाया टुकड़े
मानव चाँद से।
  •  
संध्या आयी तो
निशा भी लाएगी
सौगात उषा की।