पेश करूं कैसे
है यादों की सौगात
दिल में बसी।
किया उसने
याद मानो मुक़द्दर
बदल गया।
आखिर तुम्हे
आही गया अंदाज़
रिश्ता निभाने का।
चन्दन-बदन,
चंचल-चितवन
महके तन-मन।
घायल हुआ
दिल तेरी अदा से
एक नज़र में।
हुई रौशनी
प्यार की, क़ि दिल
रौशन होगया।
प्यार के रंग
मेरी चाहत के ढंग
दोनों निराले।
साँझ ढ़ले
शंख बजे, दीप जले
याद आये तेरी।
कैसे मानलूं
उसका इश्के जुनूँ
था मेरे लिए।
उसकी चाहत ने
चैन मेरा चुराया
मै क्या करूँ।
खूबसूरती
ज्यादा बन जाती है
अपनी दुश्मन।
चांदनी रात में
हाथ तेरे हाथ में
भुलाऊँ कैसे?
तुझे देखूं तो
मेरा अक्श आँखों में
ग़ज़ब ढाता है।
उसने कुछ
ऐसा किया बयां कि
शायरी होगयी।
इश्क़ ज़ज्बाती
समुन्दर जिसमे
डूब के जाना।
सच्चे मित्र जो
दुःख में आये काम
बाकी बेदाम।
तू ही जन्नत
तू ही प्यार, तू ही
बहार मेरी।
जीवन भर
सताया प्यार ने
जो बेवफा था।
गीत विरह के
गांयें चंचल नैना
ज्यूँ तोता-मैना।
चंचल चितवन
महके जीवन, क्या
रूप सलोना ?
दर्दे-जिगर
दर्दे-वफ़ा, फिरभी
सतायें आप ?
ताक़त का ग़रूर
किसी-2 में जरूर
न सारे मग़रूर।
सोचोगे अच्छा
पाओगे अच्छा तो
होगा भी अच्छा।
जिसके दिल में
दूसरों के लिये मान
है वही इंसान।
किया मज़ाक
संजीदगी पर वो
खिलखिलाया।
रात में सन्नाटा
चीखता बेदर्दी से
जैसे कुत्ता कोई।
कटु वचन
बनादे दोस्त-दुश्मन
बिंधे ये मन।
जाने कौन था
काली रात के साये में
क्या मेरा डर?
काँटों की डगर पे
रस्ते का पत्थर जैसा
मेरा जीवन।
खग बोले तो
जीवन डोले अनोखी
प्रातः बेला मे।
मेघ नभ में
चाँद-तारे बिचारे
छिपते फिरें।
इधर तेज़
उधर तम, दोनों
पक्ष सिक्के के।
रात ने जन्मा
उजाला, रंज क्यों
बिछड़ने का ?
निशा के जाते
लायी उषा रवि को
स्व-आँचल में।
सीख बया की
बन्दर को, घोंसला
गंवाना पड़ा।
एक दीये में
जलके तेल-बाती
तेज़ फैलाती।
वादा निभाने
तोड़ लाया टुकड़े
मानव चाँद से।
संध्या आयी तो
निशा भी लाएगी
सौगात उषा की।