ताक़त का ग़रूर
किसी-2 में जरूर
न सारे मग़रूर।
पाओगे अच्छा तो
होगा भी अच्छा।
दूसरों के लिये मान
है वही इंसान।
संजीदगी पर वो
खिलखिलाया।
चीखता बेदर्दी से
जैसे कुत्ता कोई।
बनादे दोस्त-दुश्मन
बिंधे ये मन।
काली रात के साये में
क्या मेरा डर?
रस्ते का पत्थर जैसा
मेरा जीवन।
किसी-2 में जरूर
न सारे मग़रूर।
पाओगे अच्छा तो
होगा भी अच्छा।
दूसरों के लिये मान
है वही इंसान।
संजीदगी पर वो
खिलखिलाया।
चीखता बेदर्दी से
जैसे कुत्ता कोई।
बनादे दोस्त-दुश्मन
बिंधे ये मन।
काली रात के साये में
क्या मेरा डर?
रस्ते का पत्थर जैसा
मेरा जीवन।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें