बुधवार, 7 मई 2014

'हाइकू' में दुःख-सुख-अंधियारा-उजियारा

ताक़त का ग़रूर
किसी-2 में जरूर 
न सारे मग़रूर।
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सोचोगे अच्छा
पाओगे अच्छा  तो
होगा  भी अच्छा।
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जिसके दिल में
दूसरों के लिये मान
है वही इंसान।
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किया मज़ाक
संजीदगी पर वो
खिलखिलाया।
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रात में सन्नाटा
चीखता बेदर्दी से
जैसे कुत्ता कोई।
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कटु वचन
बनादे दोस्त-दुश्मन
बिंधे ये  मन।
  •  
जाने कौन था
काली रात के साये में
क्या  मेरा डर?
  •  
काँटों की डगर पे
रस्ते का पत्थर जैसा
मेरा जीवन।
















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