खग बोले तो
जीवन डोले अनोखी
प्रातः बेला मे।
चाँद-तारे बिचारे
छिपते फिरें।
उधर तम, दोनों
पक्ष सिक्के के।
उजाला, रंज क्यों
बिछड़ने का ?
लायी उषा रवि को
स्व-आँचल में।
बन्दर को, घोंसला
गंवाना पड़ा।
जलके तेल-बाती
तेज़ फैलाती।
तोड़ लाया टुकड़े
मानव चाँद से।
निशा भी लाएगी
सौगात उषा की।
जीवन डोले अनोखी
प्रातः बेला मे।
चाँद-तारे बिचारे
छिपते फिरें।
उधर तम, दोनों
पक्ष सिक्के के।
उजाला, रंज क्यों
बिछड़ने का ?
लायी उषा रवि को
स्व-आँचल में।
बन्दर को, घोंसला
गंवाना पड़ा।
जलके तेल-बाती
तेज़ फैलाती।
तोड़ लाया टुकड़े
मानव चाँद से।
निशा भी लाएगी
सौगात उषा की।

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