मंगलवार, 6 मई 2014

प्रकृति पर 'हाइकू'

खग बोले तो
जीवन डोले अनोखी 
प्रातः बेला  मे।
  •  
मेघ नभ में
चाँद-तारे बिचारे
छिपते फिरें।
  •  
इधर तेज़
उधर तम, दोनों
पक्ष सिक्के के।
  •  
रात ने जन्मा
उजाला, रंज क्यों
बिछड़ने का ?
  •  
निशा के जाते
लायी उषा रवि को
स्व-आँचल में।
  •  
सीख  बया की
बन्दर को, घोंसला
गंवाना पड़ा।
  •  
एक दीये में
जलके तेल-बाती
तेज़ फैलाती।
  •  
वादा निभाने
तोड़ लाया टुकड़े
मानव चाँद से।
  •  
संध्या आयी तो
निशा भी लाएगी
सौगात उषा की।











कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें