अंतिम चिट्ठी
रामेश ने अपने बेटे को एक चिट्ठी लिखी। वह चिट्ठी उसकी जिंदगी की अंतिम चिट्ठी थी। रामेश को कैंसर था और डॉक्टरों ने उसे बस कुछ ही महीने दिए थे। वह अपने बेटे से मिलना चाहता था, लेकिन उसका बेटा अमेरिका में रहता था और वह उससे बहुत सालों से बात नहीं करता था।
रामेश का बेटा राजीव था। वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और अमेरिका में एक बड़ी कंपनी में काम करता था। वह अपने पिता से नाराज था क्योंकि उसने उसकी शादी के लिए एक लड़की का चुनाव किया था जो उसकी पसंद नहीं थी। राजीव को एक अमेरिकन लड़की से प्यार हो गया था और वह उससे शादी करना चाहता था। लेकिन रामेश ने उसकी बात नहीं मानी और उसे अपनी पसंद की लड़की से शादी करने के लिए मजबूर किया। राजीव ने अपने पिता का आदेश माना और शादी कर ली, लेकिन वह खुश नहीं था। वह अपनी पत्नी से तलाक लेने का फैसला कर लिया और अमेरिका चला गया। उसने अपने पिता को कभी माफ नहीं किया और उनसे दूर रहने लगा।
रामेश को अपने बेटे की याद आती थी। वह उससे बात करना चाहता था, लेकिन उसका बेटा उसके कॉल का जवाब नहीं देता था। वह उसे चिट्ठियां भेजता था, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आता था। वह अपने बेटे को समझाना चाहता था कि वह उसके भले के लिए ही उसकी शादी करवाया था। वह उसे बताना चाहता था कि वह उससे प्यार करता है और उसे माफ कर दे। वह उसे बताना चाहता था कि वह अब मरने वाला है और उससे आखिरी बार मिलना चाहता है।
रामेश ने अपनी अंतिम चिट्ठी में यह सब लिखा। वह अपने बेटे से गुजारिश की कि वह उससे मिलने आए। वह उसे अपना पता भी लिखा। वह चिट्ठी अपने पास रखा और अपने बेटे का इंतजार करने लगा।
कुछ दिनों बाद, रामेश की हालत बिगड़ गई। वह अस्पताल में भर्ती हो गया। वह अपने बेटे को देखने की उम्मीद करता रहा, लेकिन उसका बेटा नहीं आया। रामेश की आँखें बंद हो गईं और वह इस दुनिया से विदा हो गया।
राजीव को अपने पिता की मौत का खबर मिली। वह शोक में डूब गया। वह अपने पिता को देखने के लिए भारत आया। वह अपने पिता के घर पहुंचा। वहां उसे अपने पिता की चिट्ठी मिली। वह उसे पढ़ा और रोने लगा। वह अपने पिता को समझने लगा। वह अपने पिता को माफ करने लगा। वह अपने पिता को प्यार करने लगा। लेकिन अब वह अपने पिता से कुछ नहीं कह सकता था। वह अपने पिता से कुछ नहीं मांग सकता था। वह अपने पिता से कुछ नहीं दे सकता था। वह अपने पिता को खो चुका था।
वह अपने पिता की चिट्ठी को अपने सीने से लगाया और रोता रहा। वह अपने पिता के शव को देखने गया। वह उसके माथे पर एक प्यारा सा चुंबन दिया और उसे अंतिम विदाई दी। वह अपने पिता के आशीर्वाद को महसूस करता हुआ अपने जीवन में एक नया मोड़ लेने का फैसला किया। वह अपनी पुरानी लव स्टोरी को फिर से शुरू करने का इरादा रखता हुआ अमेरिका लौटा। वह अपने पिता की चिट्ठी को अपने पास हमेशा रखता रहा। वह उसे पढ़ता रहा। वह उससे बात करता रहा। वह उससे माफी मांगता रहा। वह उससे प्यार करता रहा।
यह थी रामेश की अंतिम चिट्ठी। यह थी राजीव की अंतिम चिट्ठी। यह थी एक पिता और बेटे की अंतिम चिट्ठी।
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